बदांयू 5 सितंबर।
गंगा का उफान थमने का नाम नहीं ले रहा। लगातार जलस्तर में वृद्धि बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए मुसीबत बनी हुई है। बाढ़ के पानी से टापू बने ग्रामीण इलाकों में जलस्तर और बढ़ गया है। खादर के खेतों व खादर में कई गांवों में कई फुट पानी भरा हुआ है।
किसानों की मक्का, बाजरा की फसलें पीली पड़कर बर्बाद हो गई हैं। फसलों की बर्बादी देख किसान घबराए हुए हैं। जिले में गंगा का जलस्तर बृहस्पतिवार को दो सेंटीमीटर और बढ़ गया। गंगा खतरे के निशान से 22 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। वहीं नरौरा, बिजनौर व हरिद्वार से पानी का डिस्चार्ज लगातार जारी है।
बाढ़ का प्रभाव जिले में पिछले एक माह से बना हुआ है। बाढ़ के प्रभाव ने किसानों व ग्रामीणों का काफी नुकसान किया है। सर्वाधिक नुकसान फसलों का है। बाढ़ का पानी न उतरने के कारण प्रशासन किसानों की फसलों की क्षति का आकलन नहीं कर सका है। एक माह से अधिक मक्का बाजरा के जिन खेतों में पानी भरा हुआ है उन खेतों में फसलें पूरी तरह सड़कर पीली पड़ गई हैं। तमाम फसलें खेतों में हीं गिर गईं जिससे चारा भी नहीं बन सकेगा।
धान की फसल को भी पचास फीसदी से अधिक की क्षति है। गंगा की बाढ़ से सहसवान , उसहैत, दातागंज सहित कछला के आस पास के ग्रामीण प्रभावित हैं। तमाम गांव में पानी भरा हुआ है।
मथुरा-बरेली मार्ग पर हसनपुर गांव से कछला तक सड़क के दोनों ओर खेतों में कई कई फुट पानी भरा हुआ है। खेतों की फसलें भी खराब हो गई हैं। कछला गंगाघाट के दक्षिणी किनारे पर काफी पानी आश्रमों और भारत विकास परिषद के भवन तक फैला हुआ है। अंत्येष्टि स्थल के चबूतरा के पास तक गंगा की बाढ़ का पानी भरा हुआ है। वहीं अंत्येष्टि स्थल की ओर जाने वाले वाले मार्ग के मैदान में पानी है। इससे वाहनों के निकलने में दिक्कतें हो रही हैं। घाट पर बनी झोपड़ियों व अस्थायी दुकानों तक पानी की दस्तक है।
प्रदीप प्रजापति




















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