उत्तर प्रदेश में अब मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह फर्जीवाड़ा करना आसान नहीं होगा। जल्द ही वर-वधु के विवाह से पहले उनकी बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज होगी। तब उन्हें सरकारी योजना का लाभ दिया जाएगा।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटियों की शादी के लिए योगी सरकार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ दे रही है। इस पर सरकार एक लाख रुपये प्रति जोड़े खर्च करती है। कन्या के बैंक खाते में 51 हजार रुपये डाले जाते हैं और बाकी धनराशि उपहारों एवं आयोजन पर खर्च की जाती है। अक्सर शिकायतें मिलती थीं कि वर या वधु के दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार कर दिए जाते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए शासन ने वर-वधु के आधार कार्ड के सत्यापन में लापरवाही पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए विवाह स्थल पर ही दोनों की बायोमैट्रिक उपस्थिति को आवश्यक कर दिया है। इसके साथ ही, जहां 100 या इससे अधिक जोड़े के सामूहिक विवाह होंगे, वहां उपजिलाधिकारी की उपस्थिति भी अनिवार्य होगी।
यही नहीं, दूसरे जिले के अधिकारी पर्यवेक्षक के रूप में नामित किए जाएंगे, जो किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर सीधे निदेशालय या मंडल के उपनिदेशक समाज कल्याण को रिपोर्ट देंगे।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के लिए कन्या के परिवार की सभी स्रोतों से आय 2 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। विवाह के समय कन्या की आयु 18 एवं वर की आयु 21 वर्ष से अधिक होना जरूरी है। विवाह के इच्छुक कन्या के अभिभावक की ओर से लड़की और लड़के का शैक्षिक योग्यता प्रमाणपत्र, आयु प्रमाणपत्र, पहचान पत्र के रूप में मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड या मनरेगा जॉब कार्ड, आरक्षित वर्ग के लिए जाति प्रमाणपत्र के साथ पासपोर्ट आकार की फोटो एवं कन्या के बैंक पासबुक की छायाप्रति तथा पंजीकृत मोबाइल फोन नंबर के साथ आवेदन करना होता है।
इस संबंध में जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की संशोधित गाइडलाइन अभी नहीं आई है। अभी विवाह का सीजन नहीं है। नवंबर से शादियाँ होंगी। तब तक गाइडलाइन भी आ जाएगी और बायोमैट्रिक अटेण्डेंस का प्रशिक्षण देकर उसी हिसाब से सॉफ्टवेयर डाउनलोड किया जाएगा। नई व्यवस्था से फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लग जाएगा।
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