उझानी से राजेश वार्ष्णेय एमके की रिपोर्ट।
उझानी बदायूं 25 अक्टूबर ।
जिसे संविधान दनिर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर सम्मान के साथ विकसित होना चाहिए था, वही पार्क आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। उझानी का डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क अतिक्रमण, गंदगी और प्रशासनिक उपेक्षा की जीती-जागती मिसाल बन चुका है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक इस पार्क की सुध साल में सिर्फ एक बार ली जाती है। आंबेडकर जयंती पर या कभी भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा औपचारिक रूप से झाड़ू लगा दी जाती है, फोटो खिंच जाती है और फिर पूरे साल के लिए पार्क को उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है। उसके बाद से पार्क पूरी तरह से सब्जी विक्रेताओं के कब्जे में रहता है।
ग्राउंड पर हकीकत यह है कि पार्क के बाहर फल-सब्जियों की दुकानें सजी हैं, ठेले लगे हैं। पार्क के मुख्य गेट के ठीक सामने टाट-पट्टी और तिरपाल टांग कर दुकानदारी की जा रही है, जिससे अंदर लगी बाबा साहेब की प्रतिमा ही नहीं दिखती। पार्क अपना अस्तित्व ही खो चुका है।
अंदर का हाल और भी शर्मनाक है। जहां बच्चों को खेलना चाहिए था, वहां सब्जी की क्रेट व साइकिलें और हाथ-ठेले खड़े रहते हैं। झाड़ू लगती है या नहीं, इसका किसी को पता नहीं। चारों तरफ गंदगी का अंबार है।
सबसे बड़ा सवाल यही है – जब संविधान निर्माता की प्रतिमा के ही सामने अतिक्रमण की टाट-पट्टी टंगी हो, तो आम पार्कों का क्या हाल होगा? यह सिर्फ अतिक्रमण नहीं, सीधे-सीधे महापुरुष का अपमान है। नगर पालिका की जिम्मेदारी बनती है कि पार्क को अतिक्रमण मुक्त कराए, लेकिन सबने आंखें मूंद रखी हैं।
स्थानीय लोगों में इसको लेकर भारी आक्रोश है। लोगों ने नगर पालिका और जिला प्रशासन से मांग की है कि आंबेडकर पार्क को तत्काल अतिक्रमण से मुक्त कराकर उसकी गरिमा बहाल की जाए, नियमित सफाई और देखभाल की व्यवस्था की जाए।






bdnindia.com bdnindia.com | www.bdnindia.com