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सहसवान में ‘पर्ची राज’ पर बवाल: नगर पालिका के नाम पर वसूली, जनपद बदायूं में 7 पालिका-14 पंचायतों में नहीं है ये सिस्टम

सहसवान में ‘पर्ची राज’ पर बवाल: नगर पालिका के नाम पर वसूली, 7 पालिका-14 पंचायतों में नहीं है ये सिस्टम।

शासनादेश कहां? पर्ची पर हाथ से लिखी रकम, वाहन चालकों में रोष, बोले- जांच नहीं तो आंदोलन।

बदांयू 21 अक्टूबर।

नगर पालिका सहसवान में चल रही वाहन वसूली अब सवालों के घेरे में है। नगर पालिका के नाम की एक पर्ची दिखाकर वाहनों से खुलेआम शुल्क वसूला जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि पर्ची पर न तो तारीख प्रिंट है, न वाहन नंबर, न ही तय रकम। सब कुछ कलम से भरा जा रहा है। आखिर ये वसूली किस आदेश से हो रही है? पैसा सरकारी खजाने में जा रहा है या निजी जेब में? नगर पालिका चुप है और वाहन चालकों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

चालकों द्वारा दिखाई गई पर्ची के मुताबिक रेट लिस्ट कुछ इस तरह है –

– स्लीपर / रंगशाला : 150 रुपये
– बस सिंगल : 120 रुपये
– पिकअप / ट्रैक्टर : 80 रुपये
– टेंपो-मैजिक / थ्री व्हीलर ऑटो : 50 रुपये
– ई-रिक्शा : 20 रुपये

पर्ची पर सिर्फ नगर पालिका सहसवान का नाम प्रिंट है। बाकी सब हाथ से लिखा। न कोई सील, न कोई वैध आदेश नंबर।

जनपद बदायूं में 7 नगर पालिका परिषद और 14 नगर पंचायतें हैं। चालकों का दावा है कि ऐसी वसूली व्यवस्था जनपद में और कहीं नहीं है। अगर शासन से आदेश आया है तो सभी निकायों में लागू होना चाहिए। अगर आदेश नहीं है तो सहसवान में किसके इशारे पर वसूली चल रही है? ये सीधा-सीधा जांच का विषय है।

वाहन चालकों का आरोप बेहद गंभीर है। उनका कहना है कि वसूली करने वाले लोग दबंग प्रवृत्ति के हैं। पहले भी इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई थी, जिसके बाद कुछ महीने वसूली बंद रही थी। आरोप है कि अब फिर से वही खेल शुरू हो गया है। डग्गामार वाहनों के नाम पर चालकों का उत्पीड़न हो रहा है।

पर्ची काटी जा रही है, पर पैसा कहां जा रहा है पता नहीं। हमसे जबरन वसूली की जा रही है। – एक पीड़ित वाहन चालक।

1. क्या नगर पालिका ने वसूली के लिए कोई वैध ठेका / आदेश जारी किया है?
2. वसूल की जा रही रकम का कोई सरकारी रसीद और खाते में जमा होने का रिकॉर्ड है?
3. वसूली करने वाले लोग पालिका के अधिकृत कर्मचारी हैं या प्राइवेट लोग?
4. अगर व्यवस्था वैध है तो पूरे जनपद में लागू क्यों नहीं?

वाहन चालकों ने दो टूक चेतावनी दी है – निष्पक्ष जांच कर अवैध वसूली पर रोक लगे, वरना बड़ा आंदोलन होगा।

अब गेंद प्रशासन के पाले में है। सहसवान की इस ‘पर्ची’ की हकीकत क्या है, इसका खुलासा तो नगर पालिका के दस्तावेज और अधिकारियों की जांच ही करेगी।

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