बदायूं में इंटरलॉकिंग की ईंटें उखाड़कर ले जाने पर बवाल, सत्ताधारी नेताओं की शिकायत के बाद मामला गरमाया
कलेक्ट्रेट से लालपुल जाने वाले प्रमुख मार्ग पर जिला पंचायत अध्यक्ष के आवास के सामने हुई घटना, सरकारी धन से हाल ही में कराया गया था इंटरलॉकिंग का कार्य
बदायूं। शहर के प्रमुख मार्ग कलेक्ट्रेट से लालपुल की ओर जाने वाली सड़क पर जिला पंचायत अध्यक्ष के आवास के सामने इंटरलॉकिंग की ईंटें उखाड़कर ले जाने का मामला सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि करीब आठ-दस दिन पहले ही फुटपाथ पर सरकारी धन से इंटरलॉकिंग का कार्य कराया गया था। इसके बावजूद बीती रात किसी व्यक्ति द्वारा जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली की मदद से इंटरलॉकिंग की ईंटें उखड़वाकर ले जाने की कोशिश की गई। घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और विरोध जताया। सत्ताधारी दल के नेताओं की शिकायत के बाद मामला और गरमा गया है।
बताया जा रहा है कि यह मार्ग शहर के प्रमुख रास्तों में शामिल है। इसी मार्ग पर सदर विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष और पूर्व विधायक धर्मेंद्र शाक्य सहित कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों के आवास स्थित हैं। ऐसे महत्वपूर्ण मार्ग पर हाल ही में कराए गए निर्माण कार्य की ईंटें उखाड़े जाने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बीती रात एक व्यक्ति जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर मौके पर पहुंचा और फुटपाथ पर लगी सीमेंट की इंटरलॉकिंग ईंटों को उखड़वाकर ले जाने लगा। यह देखकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए सवाल किया कि जब आठ-दस दिन पहले ही इंटरलॉकिंग का काम कराया गया था, तो उसे इतनी जल्दी उखाड़ने की जरूरत क्यों पड़ी।
घटना के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि इंटरलॉकिंग की ईंटें उखाड़ने का आदेश किसने दिया और किसके निर्देश पर निर्माण सामग्री को वहां से हटाया जा रहा था। यदि निर्माण कार्य सरकारी धन से कराया गया था, तो इतनी जल्दी उसे हटाने के पीछे क्या कारण रहा, यह भी जांच का विषय है।
सत्ताधारी राजनीतिक नेताओं की ओर से शिकायत किए जाने के बाद मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ईंटें उखाड़ने के लिए संबंधित विभाग से अनुमति ली गई थी या नहीं और इस कार्रवाई के पीछे वास्तविक वजह क्या थी।
अब पूरे मामले में संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, इंटरलॉकिंग की ईंटें उखाड़ने के आदेश और कार्रवाई की जिम्मेदारी तय की जाए तथा सरकारी धन और निर्माण कार्य से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया जाए।

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