8:41 am Wednesday , 21 October 2026
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बुराइयों का अंत ही रावण का अंत है : आचार्य संजीव रूप

बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में मंगलवार को दशहरा पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने वैदिक यज्ञ संपन्न कराया। उन्होंने श्रद्धालुओं को दशहरा पर्व का महत्व बताते हुए अपने भीतर की बुराइयों को समाप्त करने का आह्वान किया। आचार्य ने कहा कि राम और रावण का युद्ध केवल दो व्यक्तियों के बीच का संघर्ष नहीं, बल्कि अच्छाई और बुराई के बीच की लड़ाई है। रावण का अंत तभी सार्थक होगा, जब मनुष्य अपने भीतर छिपी बुराइयों को समाप्त करेगा। यदि व्यक्ति अपने अंदर बुराइयों को पालकर रखता है, तो वह वास्तव में रावण को जीवित रखे हुए है।
उन्होंने कहा कि बुराइयां व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति में बाधक बनती हैं। सच्ची प्रगति का मार्ग सत्य, सदाचार, ईमानदारी और कर्तव्यपालन से होकर गुजरता है। भगवान श्रीराम ने मर्यादा, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलकर आदर्श प्रस्तुत किया। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में इन श्रेष्ठ गुणों को अपनाना चाहिए। आचार्य ने कहा कि जुआ खेलना, नशा करना, अहंकार पालना, रिश्वत लेना, चोरी करना, झूठ बोलना और अपने वचन का पालन नहीं करना ऐसी बुराइयां हैं, जिनसे व्यक्ति को दूर रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इन दुर्गुणों का त्याग करना ही वास्तविक विजयादशमी है। भगवान श्रीराम की सच्ची जय तभी होगी, जब हम अपने जीवन से बुराइयों को दूर कर अच्छाइयों को अपनाएंगे। दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन का पर्व नहीं, बल्कि अहंकार, छल-कपट और व्यसनों को समाप्त करने की प्रेरणा भी देता है।
इस मौके पर राकेश आर्य, मास्टर अगरपाल सिंह, संतोष कुमारी, रेखा रानी, कौशकी, लीलावती देवी सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे। आर्य संस्कारशाला के बच्चों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

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