6:27 pm Monday , 14 September 2026
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काली पन्नी तानकर जिंदगी गुजार रहा परिवार, वर्षों से आवास की आस

काली पन्नी तानकर जिंदगी गुजार रहा परिवार, वर्षों से आवास की आस

बरसात, गर्मी और सर्दी में बदहाल हालात में रहने को मजबूर परिवार, कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से लगा चुका है आवास की गुहार

मैनपुरी। आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार ऐसे हैं, जो मूलभूत सुविधाओं से वंचित होकर बदहाल परिस्थितियों में जीवन गुजारने को मजबूर हैं। करहल विकासखंड क्षेत्र के पतारा के मजरा किशनपुर में एक परिवार की स्थिति सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत बयां कर रही है। परिवार कच्ची ईंटों से बने छोटे से आशियाने में रहने को मजबूर है और घर की छत पर काली पन्नी तानकर किसी तरह बरसात और मौसम की मार से बचने का प्रयास कर रहा है।

बताया गया है कि परिवार पिछले करीब 40 वर्षों से इसी तरह की परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहा है। परिवार में बच्चे भी हैं और रोजाना मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण किया जाता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार के लिए अपने स्तर से पक्का मकान बनवाना संभव नहीं है।

कच्ची दीवारें और काली पन्नी ही सहारा

परिवार के रहने के लिए बना आशियाना कच्ची ईंटों से तैयार है। मकान की छत पर पक्की छत के स्थान पर काली पन्नी डालकर गुजारा किया जा रहा है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। तेज बारिश और हवा के दौरान पन्नी के सहारे घर को सुरक्षित रखना परिवार के लिए मुश्किल हो जाता है।

परिवार का कहना है कि गर्मी, सर्दी और बरसात हर मौसम में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बारिश के दौरान घर में पानी आने का खतरा बना रहता है, जबकि तेज आंधी में काली पन्नी उड़ने की चिंता बनी रहती है। छोटे बच्चों के साथ इस तरह के असुरक्षित मकान में रहना परिवार के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है।

वर्षों से लगा रहे आवास की गुहार

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान दिलाए जाने की मांग की, लेकिन अभी तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। परिवार का आरोप है कि वर्षों से आवास की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन उन्हें सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाया।

परिवार रोज मजदूरी करके अपनी आजीविका चलाता है। दिनभर मेहनत के बाद जो आमदनी होती है, उससे परिवार का भोजन और बच्चों की जरूरतें पूरी करना ही मुश्किल है। ऐसे में पक्का मकान बनवाने के लिए आवश्यक धनराशि जुटाना उनके लिए संभव नहीं है।

प्रशासन से मदद की आस

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर पात्रता की जांच कराने और पात्र पाए जाने पर प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा अन्य उपयुक्त सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाए जाने की मांग की है। परिवार का कहना है कि यदि उन्हें पक्का मकान मिल जाता है तो बच्चों के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने में बड़ी राहत मिलेगी।

अब देखना यह है कि वर्षों से आवास की आस लगाए बैठे इस परिवार की समस्या पर जिम्मेदार अधिकारी कब ध्यान देते हैं और सरकारी योजना का लाभ कब तक मिल पाता है।

जनपद — मैनपुरी
रिपोर्टर — अरुण कुमार

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