NEHA MEHTA
कुछ दर्द है, जो तुमसे कहती नहीं !
खुश दिखती हूँ, पर रहती नहीं !!
पर समझो कभी तकलीफ़ मेरी !
नहीं सुनता यहाँ कोई चीख मेरी !!
ये चार पंक्तियां यहाँ हज़ार लोगों की कहानी बयां कर देती है जो ये ऊपर से ख़ुश दिखने वाले लोग अंदर से कितने टूटे है ये कौन जानता है और ये कौन जानना चाहता है ये तकलीफ़ जो किसी को सुनाते नहीं अगर कोई महसूस करे तो चीखे भी सुन ले जो दिल में दब कर रह गई
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