Ratna Nautiyal
क्या हनुमान जी की असली ताकत सिर्फ उनका विशाल शरीर और बाहुबल था? 🚩
जब भी हम बजरंगबली का नाम लेते हैं, हमारे दिमाग में एक गदाधारी, पर्वतों को एक हाथ पर उठाने वाले और समुद्र लांघने वाले महाबली की छवि उभरती है। लेकिन क्या रामायण के सबसे शक्तिशाली योद्धा की ताकत सिर्फ उनकी मांसपेशियों में थी?
कदापि नहीं।
हनुमान जी की वास्तविक शक्ति उनके शरीर से कहीं ज्यादा उनके मन, चेतना और आठ सिद्धियों में छिपी थी:
अष्ट सिद्धि और नवनिधि: वे इच्छामात्र से परमाणु जितने सूक्ष्म (‘अणिमा’) और ब्रह्मांड जितने विशाल (‘महिमा’) हो सकते थे। उनका रूप भौतिक सीमाओं का नहीं, इच्छाशक्ति का खेल था।
असीम ज्ञान और बुद्धि: शास्त्रों में उन्हें ‘बुद्धिमतां वरिष्ठम्’ कहा गया है। लंका में कूटनीति हो या लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए संजीवनी की पहचान—उनकी त्वरित बुद्धि का कोई सानी नहीं था।
अहंकार-शून्य भक्ति: जिस शक्ति के सामने रावण और मेघनाद कांपते थे, वह शक्ति प्रभु श्री राम के चरणों में पूरी तरह समर्पित थी। उनका कोई व्यक्तिगत स्वार्थ या अहंकार नहीं था—और यही समर्पण उन्हें अजेय बनाता था।
मन और इन्द्रिय निग्रह: शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति अपने मन और काम-क्रोध को वश में कर लेता है, उसके सामने त्रिलोक की शक्तियां झुक जाती हैं। हनुमान जी का ‘जितेन्द्रिय’ होना ही उनका सबसे बड़ा सामर्थ्य था।
पहाड़ उठाना तो केवल एक प्रदर्शन था, हनुमान जी का असली महाबल उनका समर्पण, अपार ज्ञान और अडिग भक्ति थी। जब तक अहंकार रहता है, शक्ति कमजोर होती है; और जब अहंकार मिटता है, तब मनुष्य में दिव्य शक्ति जागृत होती है।
जयश्री राम जयश्री बजरंगबली महाराज🙏
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