10:31 am Monday , 31 August 2026
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मरु की तपती भूमि में – Sugandha Sharma

Sugandha Sharma

मरु की तपती भूमि में
होती है जल की आस नहीं
पतझड़ में सृजन नहीं होता
सागर से बुझती प्यास नहीं.
पुष्पित वृक्ष तभी होते
जब रवि की गर्मी पाते हैं
प्रेमी भी पूर्ण तभी होते
जब विरह में जल जाते हैं।

#सुगंधा
#हर_हर_महादेव

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