Sugandha Sharma मरु की तपती भूमि में होती है जल की आस नहीं पतझड़ में सृजन नहीं होता सागर से बुझती प्यास नहीं. पुष्पित वृक्ष तभी होते जब रवि की गर्मी पाते हैं प्रेमी भी पूर्ण तभी होते जब विरह में जल जाते हैं। #सुगंधा #हर_हर_महादेव