उझानी बना खुदा नगर: जल निगम की मिट्टी में दफन हुए वादे, सड़कों पर उड़ रही धूल और सिस्टम की नींद।
उझानी, बदायूं 27 मई 2026।
“विकास होगा” का ढोल पीटकर आई जल निगम की जेसीबी ने उझानी को ऐसा खोदा कि पूरा शहर अब धूल के बवंडर और हादसों की प्रयोगशाला बन गया है। कछला रोड से लेकर साहूकारा, गोतमपुरी से पुरानी अनाज मंडी तक, जहां देखो वहां सड़क के सीने पर मिट्टी का मरहम लगाकर छोड़ दिया गया। महीने बीत गए, पाइप तो बिछ गए पर जनता की सांसें उखड़ रही हैं।
धूल का कहर: सांस लो तो बीमारी, मुंह बंद रखो तो मजबूरी

घंटाघर चोराहा, पंखा रोड पर स्कूटी से निकलो तो ऐसा लगता है मानो रेगिस्तान में रैली हो रही हो। वाहनों के पीछे धूल का ऐसा गुबार कि दुकानदार दिनभर शटर आधे गिराकर बैठे हैं। बुजुर्ग खांसते-खांसते कहते हैं, “पानी आए न आए, टीबी जरूर आ जाएगी।” नगर पालिका के झाड़ू तक इन गड्ढों में दम तोड़ देते हैं। सफाई कर्मचारी बोला, “साहब, झाड़ू लगाएं या कुश्ती लड़ें इन टीले से?”
हर दिन खून, हर मोड़ पर दर्द
बदायूं रोड पर कल ही एक छात्रा साइकिल समेत मिट्टी में धंसी। घुटना फटा, बस्ता फटा, और उम्मीद भी। बाइक सवार तो रोज ही ‘धड़ाम शास्त्र’ का पाठ कर रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं: “ये विकास है या बाइक वालों का इम्तिहान?”
बारिश आई तो उझानी बनेगा ‘कीचड़-ताल’
अभी तो धूल उड़ा कर जल निगम इतरा रहा है। दो दिन पानी बरसा तो यही सड़कें दलदल का वर्ल्ड कप कराएंगी। स्कूली बच्चे, बीमार, गर्भवती महिलाएं घरों में कैद हो जाएंगे। रिक्शे वाले पहले ही हाथ जोड़ चुके हैं, “बारिश में इस रास्ते बुलाओगे तो हमारा रिक्शा नहीं, जमानत जब्त हो जाएगी।”
जनता का फूटा गुस्सा: खोदा तुमने, भरो भी तुम
साहूकारा के व्यापारी गरजे, “जिस फुर्ती से सड़क चीर दी, उसी फुर्ती से जोड़ क्यों नहीं देते? क्या टेंडर में सिर्फ खोदने का पैसा था, भरने का नहीं?” पुरानी अनाज मंडी में बुजुर्गों ने तंज कसा, “जल निगम ने पाइप डाला है या जनता की सहनशक्ति नापने का पैमाना?”
अल्टीमेटम ऑन द रॉक
” उधर जल निगम बोले ” समय से काम होगा” और नगर पालिका बोले “ये हमारे अंडर नहीं।” यानी फुटबॉल बनी जनता और गोलपोस्ट है जिम्मेदारी।
उझानी के बाशिंदे पूछ रहे है पानी की पाइप के नाम पर हमें कब तक धूल फांकनी पड़ेगी?।
राजेश वार्ष्णेय एमके।

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