Sunita Surbhi है जो दस्तूरे उल्फ़त निभाओ सनम। शाम ढलने को है आ भी जाओ सनम। जान पर बन गईं हैं ये रुसवाईयाँ - इस कदर भी न मुझको सताओ सनम। - सुनीता पाण्डेय 'सुरभि'ⓢ💞