PRIYA SHARMA रात की ख़ामोशी में दिल करीब आ जाते हैं, नज़रों से नज़रें मिलते ही अरमान जाग जाते हैं। लफ़्ज़ों की ज़रूरत कहाँ रहती है उस पल, जब दो जिस्म नहीं, दो दिल एक हो जाते हैं।