GuptaManjari
रंग पियाने ऐसा फेंका प्रेम का
बच न पाई फिर इस बौछार से
अंगअंग भीगा उनकी सौगात से
दूर न रह पाई उनके प्यार से
अप्रतिम मनुहार उनकी
मन के तार छेड़ गई
आँखों सेकी बातें
जाने कितना बोल गई
डूबी पिय प्रेममें ऐसे
अब रंग को न धोउंगी
पिया प्रेम की चादर ओढ़े
लंबी नींद में सो जाऊंगी💖
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