neelam
जन्मों के सम्बन्ध से भी अधिक
पावन और पवित्र होते हैं
मन के अनुबंध
बिना
किसी डोर-रीति रिवाज़
बंध जाते हैं ख़्वाब
इक दूजे से,
न ठगे जाने का भय
न छलावे की गुंजाइश
हस्तरेखाओं से परे
बिन बंधन के बंधे
ये आत्मबधंन,
अपूर्ण होकर भी
सम्पूर्ण
वो सम्बन्ध
जिनके मध्य हैं मन के अनुबंध
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