सारिका सिंह (मनी )
घूंघट जो खोला वो बोले चाँद हो तुम
मेने नजर मिला कर बोला नादान हो तुम
वो बोले आफताब हो तुम
मेने कहा बे ईमान हो तुम
वो बोले नहीं नहीं शराब हो तुम
हम बोले बहुत खराब हो तुम
वो बोले किताब हो तुम
हम बोले नादान हो तुम
हम हुस्न की पूरी दाँसता है समझ लो तुम
#सिर्फ_तुम,#तेरी_यादें
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