Ravina Mishra
क्यों गुमान हो रहा है तुमको अपनी प्राप्ति का
अस्त्र शस्त्र भी रचे हो सृष्टि की समाप्ति का
प्रलय की ज्वाल मत बनो,तू धरा की नूर हो।
रे मनुष्य,
जल की जीवनी को तूने गन्दगी से भर दिया
जिजीविषा को द्वेष व दरिन्दगी से भर दिया
कितनी दूरी तय करोगे, शुद्धता से दूर हो।।
रे मनुष्य।
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