बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं के सांसद आदित्य यादव और सपा सुप्रीमों आखिलेश यादव के निर्देश पर सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने बदायूं के जिलाध्यक्ष आशीष यादव को छोडकर सभी पदों को पद मुक्म करने का जो निर्णय लिया है उससे ऐसा लगता है कि बदायूं की समाजवादी पार्टी में कोई धमाका होगा अब इसके आगे निर्णय क्या होगा सपा के पालनहार जाने लेकिन एक बात निश्चित है कि आगे की कार्रवाई नई सोच के साथ होगी। चर्चाओं का जो दौर चल रहा है उसकी तरफ देखें तो लगता है कि विधानसभा चुनाव में सपा जिले की छह में से दो सीटें अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को दे सकती है और ऐसा हुआ तो बिसौली सुरक्षित सीट के अलावा सपा के पास तीन सीटें बाकी बचेगी और उनमें एक सीट बनिया वर्ग को दी जा सकती है तो क्या सपा का प्रमुख वोट बैंक यादव खामोश हो पाएगा। इस पर सपा को सोचना होगा और सपा एमवाई समीकरण को लेकर मैदान में आती है तो क्या अल्पसंख्यक वोट बैंेक मुंह नहीं खोलेगा। बदायूं सदर सीट पर सपा टिकट के दो दावेदार वर्तमान तक बने हुए हैं जिनमें एक आजम खान और दूसरे अबू आजमी के करीबी बताये जाते हैं और श्री खान तथा आजमी के बीच छत्तीस का आंकडा सर्वविदित है जिसके चलते सपा सासद जया प्रदा के चुनाव में सामने भी आ चुका है और सपा चक्की के दो पाट कहे जाने वाले दोनों अपने आपसी विरोधियों को कौन से रास्ते से एक रास्ते पर लाएगी, इसका जवाब सपा वाले ही बता सकते हैं।
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