Ravina कविता दो दिल की संधि क्षेत्र कविता से मिलते चपल नेत्र रस भरे प्यार का शुभारंभ कविता बिनु सीमित प्रणय क्षेत्र। कविता गंगा की धवल धार कवि हिय हिम गृह से निकल निकल भावों की लहरें लहरातीं हिमशब्द खंड से पिघल पिघल।