9:05 am Friday , 21 August 2026
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बहुत हो गई तपस्या – अब तो हल करिये समस्या ?

बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं की समस्याओं की बात करें तो ऐसा लगता है कि देश की आजादी के बाद समस्याएं कभी कम नहीं हुई, हमेशा सुरसा की तरह बडी होती गई और हमारे पालनहार क्षेत्र के मतदाताओं को पालनहार तपस्या करते तो मिले परंतु समस्या का निराकरण तो शायद कभी मिला हो, ऐसा नहीं कि पालनहारों ने कोशिश नहीं की बस अपनी मनमानी के आगे किसी की नहीं सुनीं और यही जनपद की समस्याओं की जननी नजर आती है। विकास को लेकर राजनेतिक मतभेद भूलकर काम कराने का एक मामला जरूर सामने आता है जो बहेडी होते हुए बिल्सी जाने वाली सडक के निर्माण के समय तत्कालीन विधायक कृष्ण स्परूप वैश्य और भोला शंकर मौर्य का दिखता है जिसमें जनसघ और कांग्रेस के दलगत मतदभेदों को भूलकर दोनों ने मिलकर काम किया और बदायूं से बिल्सी जाने का नया रास्ता मिला। बिहार से आकर बदायूं के सांसद बनकर केंद्रीय मंत्री बने शरद यादव ने मार्डन फूड का कारखाना खुलवाया जिसके शिलान्यास पर लाखों रूपए व्यय किए गए लेकिन आज कारखाना तो दूर उसका शिलान्यास वाला पत्थर भी कहीं नहीं दिखता। बदायूं के एक सांसद ने जिले में हवाई अडडे का निर्माध कराने की मांग पांच दशक पूर्व उठाई थी लेकिन बदायूं को आज तक लम्बी दूरी की ट्रेन तक नहीं मिल पाई। इलाहबाद से आकर बदायूं के संासद बनकर कंद्रीय मंत्री सलीम इकबाल शरवानी ने निहायत इमानदारी से काम किया इसमें कोई दो राय नहीं लेकिन उनकों इतना समय कभी नहीं मिला कि उनके लगाये पत्थर का काम पूरा हुआ अथवा नहीं। शाहजहांपुर और कुशीनगर से आकर बदायूं का पालनहार बनने वालों से कोई शिकायत इसलिए नहीं क्योंकि उन्होंने कुछ अच्छा किया होता तो अपनी पार्टी से टिकट क्यों काटा जाता। सैफई से आकर बदायूं का सांसद बने धर्मेंद्र यादव ने काम तो करायें लेकिन उनके विरोधियों और तथाकथित अपनो ने ऐसी राह बनाई कि पार्टी प्रमुख परिवार का हिस्सा होने के बावजूद धर्मेंद्र यादव को अपना टिकट तक नहीं बचा मिला और वह बदायूं से दूर जाने को मजबूर हो गए।

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