Ravina चांदनी आज किसलिए नम है चांद की आंख में चुभा क्या है ख्वाब सारे उदास बैठे हैं नींद रूठी है माजरा क्या है बेसदा कागजों में आग लगाए हैं अपने रिश्तों को आजमा क्या है गुज़रे लम्हो की धूल उड़ती है अकेले इस घर में रखा क्या है।