Gunjan Agrawal
क्या स्वार्थ से कभी प्रेम हो सकता है?
क्या कभी प्रेम स्वार्थी हो सकता है?
क्यों जिसको प्रेम समझो वही सिर्फ छलावा होता है?
क्यों जीवन में प्रेम का अंजाम सिर्फदर्द ही होता है?
क्यों जिसे चाहोवो प्रेम मिलता नहीं?
क्यों जो पास हैउससे प्रेम होता नहीं?
कैसी विडम्बना है ये?
गुंजन शिशिर
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