बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के दावे खोखले साबित होते जा रहे हैं। यहां आने वाले गंभीर मरीजों के इमरजेंसी में ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। वजह है कि यहां पर तैनात स्टाफ शाम छह बजे ही इमरजेंसी के ऑपरेशन थियेटर में ताला लगा देते हैं। इसके बाद आने वाले मरीजों के साथ रेफरी का खेल शुरू हो जाता है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में व्याप्त भ्रष्टाचार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। यहां पर कॉलेज प्रबंधन की मनमानी से मरीजों को इलाज न मिलने और रेफरी का खेल कई बार उजागर हो चुका है। कई मामले देश की संसद तो विधानसभा में पहुंचे हैं, लेकिन सुधार के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। यहां कोई स्टाफ अगर अव्यवस्थाओं को उजागर करता है तो उसके खिलाफ ही कार्रवाई कर दी जाती है। इस वजह से ईमानदार छवि के कर्मचारी और कुछ डॉक्टर खामोशी से अव्यवस्थाओं को देखते रहते हैं। उनके अंदर कार्रवाई हो जाने की दहशत देखी जा सकती है। अब बात यहां पर गंभीर मरीजों के उपचार की करें तो इमरजेंसी के साथ ही ऑपरेशन थियेटर तैयार किया गया है। यह ऑपरेशन थियेटर नियम के तहत चौबीस घंटे खुलना चाहिए, लेकिन कॉलेज प्रबंधन की मनमानी से शाम छह बजे ही ताला डाल दिया जाता है।
पूर्व प्राचार्य ने तो बना डाला था निजी कॉलेज
राजकीय मेडिकल कॉलेज में होने वाले कार्यक्रम महापुरुषों की याद और उनके नाम पर होने चाहिए। सिस्टम के तरीके से यहां पर खेल होने के साथ ही पुरस्कार भी महापुरुषों के नाम पर बंटने चाहिए, लेकिन यहां पर तैनात रहे प्राचार्य एनसी प्रजापति ने तो इस सरकारी कॉलेज को निजी संपत्ति बना डाला था। उनकी तैनाती के दौरान यहां पर जो कार्यक्रम हुए वह उन्होंने अपने पिता और परिवारीजनों के नाम पर कराए थे। अवार्ड भी अपने पिता और दादा के नाम पर बंटवाए और उनकी याद में यहां पर पौधरोपण भी उनके नाम से ही कराया गया। नियम के विपरीत किए गए यह कार्य की शिकायतें शासन तक पहुंचीं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया गया।
varma
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