बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
पचास वर्ष पूर्व पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने गुरू नत्थू लाल गुप्ता के निर्देशन में हल्द्वानी से प्रकाशित उत्तर उजाला के साथ प्रवेश किया उस समय बदायूं की पत्रकारिता के दिग्गज कन्हैया लाल शर्मा, पं परमेश्वरी सहाय शंखधार, प्रकाश दीक्षित निर्मोही, सुरेन्द्र प्रसन्न सिंहा, एसपी सिंह, मनोहर लाल बजाज, पं निहाल चन्द्र शर्मा, यूसुफ निजामी, इब्ने बख्शी, अब्दुल मजीद शादां, पवन कुमार सक्सेना, कमल वर्मा, किशन चन्द जौहरी का बोलबाला था जबकि उनमें मुन्ना बाबू शर्मा का जलवा बोलता था और आफाक हुसेन, विष्ण देव चाणक्य और सूरज प्रसाद मेरे अग्रज के रूप में स्थापित हो चुके थे उस समय भी पत्रकारों में गुटबाजी थी लेकिन एक दूसरे का सम्मान तथा प्यार देने का ऐसा माहौल था जहां एक – दूसरे की बात सब सुना करते थे। कुछ समय बाद मेरा सफर बरेली के दिशा मंच पर चला गया और उसके कुछ समय उपरांत आगरा से प्रकाशित विकासशील भारत जुड गया और बाद में पंजाब केसरी पत्रकारिता के मेरे जीवन का जंक्शन बन गया जहां मुझे पत्रकारिता के दिग्गज पंजाब केसरी के सम्पादक आदरणीय रमेश जी और उसके बाद अश्विनी मिन्ना जी के साथ कार्य करते हुए महेन्द्र खन्ना जी और वीरेन्द्र सोनी जी से बहुत कुछ सीखने के साथ अपनी बात लिखने का सही तरीका आया और वर्तमान समय तक उसी राह पर चलने का प्रयास निरंतर कर रहा हूं।
अब पिछले दस वर्ष की बात की जाए तो पत्रकारिता के क्षेत्र की सच्चाई यह नजर आती है कि वर्तमान में कोई किसी के साथ कार्य करने की राह पर नहीं दिखता और अधिकांश साथियों को केवल अपनी बात में सच्चाई और बाकी सबकी बातों में बुराई नजर आती है और यह परिवर्तन किसी को कैसा लगता हों मुझे अच्छा नहीं लगता।
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