7:41 am Thursday , 20 August 2026
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जरूरत है बदायूं का भूगोल परिवर्तन की, जो चिंता हट जाए जनता की ?

बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
आजादी से पूर्व बदायूं शहर से शेरशाह सूरी द्वारा बनवाई जाने वाली काली सडक सबसे महत्वपूर्ण थी क्योंकि उस समय काली सडक बरेली- मथुरा – आगरा के मध्य थी और इसी रास्ते सेना के ट्रक एवं काफिले निकला करते थे आजादी के बाद बदायूं में तमाम सडकों का निर्माण हुआ लेकिन तमाम सडके घूम फिर के सोत नदी के पुल और शहीद भगत सिंह चौक पर कंद्रित हुई जो वर्तमान में शहर में आने और जाने वाले वाहनों के लिए जाम तथा इस क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों के दुख के झाम का कारण बन गया है।
बदायूं शहर की आबादी भले ना बडी हो परंतु यह सत्य है कि वाहनों की संख्या बहुत तेजी से बडी है। इस अवधि में सांसद धर्मेद्र यादव ने अपने समय में बाईपास बनवाया परंतु बाईपास का नक्शा बनाने वालों ने खेल कर दिया। लोगों का कहना है कि इस वाईपास को उझानी के मानकपुर से शुरू किया जाता तो उझानी के बाबू कल्याण सिंह चौक पर जाम की समस्या नहीं होती और बदायूं उझानी के बबीच सडक पर वाहनों का दवाब कम होता। आज हालत यह हो गई है कि बदायूं में लालपुल पर जाम, काली सडक पर दिनभर जाम, कचहरी जाम के शिकंजे और पुलिस लाइन चौराहा हर समय जाम के पंजे में नजर आता है।
पालनहारों से अनुरोध है कि इस समस्या को संज्ञान में लेकर कुछ ऐसे मार्ग बनवाये जो लालपुल, कचहरी, इंद्रा चौक, भामाशाह चौक और दातागंज वाले तिराहे पर वाहनों का दवाब कम करने में सहायक सिद्ध हो।

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