बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
समाज है, परिवार है, आना और जाना है अगर यह निश्चित तो यह भी निश्चित है कि हर व्यक्ति के कुछ अपने होगें, कुछ विरोधी होगें, कुछ टोकने वाले होगे तो कुछ उसके बारे में सोचने वाले भी होगें। हर व्यक्ति कुछ लोगों का सहारा होगा तो कुछ लोगों को काटे की तरह चुभता भी होगा। यह जीवन तो नहीं है पर लगता है कि जिंदगी यही है और इसी जीवन में कुछ ऐसे अपने बन जाते हैं जो बिल्कुल पैसे जैसे होते हैं, आपके सामने आपके और दूसरे के सामने उसके लेकिन होते वह किसी के नहीं हम उन अपनों को मतलबी अथवा अपना उल्लू सीधा करने वाले की उपमा भी दे सकते हैं और इस पर गहनता से थोडा सा मंथन करें तो पूरी तरह यही नजर आएगा कि उनकी हालत पैसे यानि मुद्रा जैसी है जिसके चलते उनकी हालत और उनका घर हर क्षेण बदलता रहता है।
bdnindia.com bdnindia.com | www.bdnindia.com



