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बदांयू में बाढ़- गंगा का राैद्र रूप कई गांवों से कटा संपर्क, सड़कों पर नाव, पानी में डूबे खेत घर

बदांयू 12 अगस्त।

हाईफ्लड लेवल पार कर उफनाई गंगा की धारा लगातार दूसरे दिन भी जिले में कहर बरपाती रही। मंगलवार को जलस्तर हाईफ्लड लेवल से दस सेंटीमीटर ऊपर निकल गया। बाढ़ के पानी के तेज प्रवाह से कई गांवों का संपर्क कट गया है। उफनती गंगा की धार के कहर से ग्रामीण कराह उठे हैं। गंगा की बाढ़ से कई गांव की आबादी, खेती-बाड़ी और मार्ग प्रभावित हुए। लोग आवागमन के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। प्रशासन द्वारा मोटरबोट की मदद से राहत सामग्री भी बमुश्किल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाई जा रही है।

गंगा में नरौरा बैराज से सुबह तक तीन लाख क्यूसेक से अधिक का प्रवाह बना रहा। इससे गंगा की धारा लगातार उफना रही है। कछला ब्रिज पर गंगा का हाईफ्लड लेविल 162.91 मीटर के निशान पर रहा। खतरेके निशान को गंगा ने रविवार को ही पार कर लिया था और शाम के बाद यह धारा और उफान भरने लगी।

रात करीब 10 बजे के बाद सहसवान के गांव वीरसहाय नगला,तोफियानगला,खागीनगला,भमरौलिया,तेलीनगला व गिरधारी नगला गांव में पानी भर गया प्रशासन ने इन्हें खाली कराने के निर्देश दिए हैं।

रात में ही कई मीटर सड़क बाढ़ के पानी से कट गई। इस सड़क के किनारे लगा विद्युत पोल भी धराशायी हो गया। सड़क काटकर उफनाती गंगा का पानी दूसरी ओर के ग्रामीण इलाके में पहुंच गया जिससे ग्रामीण घबरा गए। अचानक बने बाढ़ के हालात से बचाव के इंतजामों में जुट गए।

इसी तरह से बाढ़ का पानी तटीय इलाकों में कहर बरपा रहा है। चार हजार हेक्टेयर से अधिक फसलें बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गईं। पूरे दिन बाढ़ का कहर गंगा के तटीय इलाकों में बना रहा। इससे ग्रामीणों के बीच बेचैनी के हालात बने रहे। यहां बैलगाड़ी से लोग आवागमन करते देखे गए।

उसहैत, दातागंज के इलाके में रामगंगा कहर बरपा रही है लोगों को गांव में नाव चलानी पड रही है। बाढ़ का पानी चारों ओर नजर आ रहा है। गांव सिमरिया,मौसमपुर,जरतौली,सखत पुर,नवादा बदन,कुडरा मजरा,खटखोरा, लालपुर,भेंडा, शेरपुर, पट्टी बीजा सहित अन्य ग्रामीण इलाकों तक बाढ़ का पानी आबादी में पहुंच गया।बाढ़ से हर जगह हालात बेकाबू नजर आऐ।

जिन ग्रामीण इलाकों में आबादी प्रभावित हुई है उन इलाकों के ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बाढ़ से बचाव करते हुए तमाम लोगों ने घर छत पर डेरा जमा लिया है, प्रशासन ने आठ आश्रम स्थल स्थापित किए हैं।लेकिन जिनके घर कच्चे हैं और जो परिवार झोपड़ी में रहते है उनके सामने काफी दुश्वारियां उत्पन्न हो गई हैं। ऐसे परिवार सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं या सड़कों के किनारे जहां पानी नहीं है वहां डेरा जमा लिया है। खेतों में कई कई फुट पानी भरा है जो फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है।

ग्रामीणों ने बाढ़ से बचाव के लिए अपने पशुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा दिया है और स्वयं भी बचाव करने में जुटे हुए हैं। ग्रामीण बाढ़ के बढ़ते प्रकोप को लेकर चिंतित हैं। उन्हें अंदेशा है कि बाढ़ का रूप और अधिक विकराल न हो जाए। ग्रामीण राम सिंह, राज सिंह, सुम्मेरी लाल, प्रेम लाल सहित अन्य लोगों ने बताया कि 2009 के बाद इतना पानी गंगा में बढा है।

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