बदायूं की बात- सुशील धींगडा के साथ।
आजादी के बाद उझानी उपनगर जनपद का गौरव रहा जिसके चलते हमारे बुजुर्गो ने उझानी को बदायूं की आर्थिक राजधानी का नाम दिया और किसानो एवं व्यापारियों व उद्योगपतियों की मेहनत के चलते काम, दाम, राजनीति एवं सरकार की राजस्व प्राप्त करने का प्रमुख साधन होने के साथ सदैव सुर्खियों में रहा ।
रेलवे को उझानी प्रमुख आय का साधन रहा जबकि बीएल वर्मा के राज्यसभा सांसद बनने के बाद केंद्र की सरकार में मंत्री होना उझानी की नहीं जिले की राजनीति में पूरी तरह छाया हुआ है। उझानी के विधायक हरीश शाक्य और नगर पालिका चेयरमैन श्रीमती पूनम अग्रवाल भाजपा के हैं लेकिन पूर्व की सरकारों ने उझानी को योजनावृद्ध तरीके से विकास की पटरी से हटाने का काम करते हुए जिले के शेखुपर रेलवे स्टेशन के साथ जनपद के प्रमुख धार्मिक स्थल कछला के रेलवे स्टेशन को हाल्ट बनाने का वह काम किया जो तत्कालीन पालनहारों के अपने कारोबार वाले रेलवे स्टेशन नगरिया को बचाने के लिए सबसे जरूरी था।
क्योंकि बरेली – कासगंज रेलमार्ग पर रेलवे स्टेशन की संख्या कम होना थी और ऐसे में पालनहारों ने नगरिया को बचाने के लिए कछला और शेखुपर रेलवे स्टेशन की बलि चढाने जैसा काम करा दिया।
उझानी में रेल सेवा की इच्छा रखने वालों के हालात आमान परिवर्तन के उपरांत अधिक खराब हुए हैं क्योंकि आमान परिवर्तन से पूर्व बरेली कासंगज रेलमार्ग पर सभी सवारी रेलगाडिया रूका करती थी जबकि आमान परिवर्तन के बाद से तमाम रेलगाडिया उझानी में बिना रूकेे निकल जाती हैं। ओर तो ओर जितनी भी साप्ताहिक नई ट्रेन चली उनका उझानी में स्टापेज ना होना दर्शाता है कि रेल आने वाले समय में ना कर दे फेल।
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