कांटो पे चला हूं
फूलों में पला हूं, ना सितारों में चला हूं।
पतझड़ की मार सहकर मैं कांटों पे चला हूं।
आसान नहीं होता ,ये सफर बड़ा मुश्किल ।
जिंदा भी रहने वास्ते, जिंदगी से लड़ा हूं ।
कोई नहीं था आसरा, हर दरवाजे बंद थे ।
तूफा से लड़ के ,आज मैं तूफान बन हूं ।
पतझड़ की मार सहकर, कांटों पे चला हूं ।
फूलों में पला हूं, ना सितारों में चला हूं ।
पतझड़ की मार सहकर कांटों पे चला हूं ।
प्रियंका विवेक सिंह
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