बदायूं, 26 अक्टूबर।
बदायूं की राजनीति में भूचाल आ गया है। भाजपा से कन्नी काट रहे पूर्व सांसद-विधायकों ने सियासी पारा हाई कर दिया है। चर्चा जोरों पर है कि क्या बदायूं फिर 2014 से पहले वाला मुलायम सिंह का गढ़ बनने जा रहा है?
जब सपा का था एकछत्र राज: एक दौर था जब बदायूं लोकसभा से लेकर सभी विधानसभा सीटों पर सपा का कब्जा था। फिर 2014 में समीकरण बदले। अब फिर पुराने दिग्गजों की घर वापसी की चर्चाओं ने भाजपा की टेंशन बढ़ा दी है। टिकट की नाराजगी या कोई बड़ा सियासी दांव – असली वजह तो जाने वाले ही जानें, पर इतना तय है कि बदायूं लोकसभा में भाजपा की राह आसान नहीं रही।
जनता में दो मत, आगे और धमाका बाकी: कुछ लोग कह रहे हैं कि आने वाले चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ हो सकता है। तो दूसरा बड़ा वर्ग कह रहा है कि योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली, सही उम्मीदवार और कार्यकर्ताओं की मेहनत से भाजपा फिर किला फतह कर लेगी। अंदर की चर्चा ये भी है कि चुनाव की तारीख फाइनल होते ही भाजपा में भगदड़ और तेज होगी, अभी कई बड़े नाम लाइन में हैं।



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