Sunita Surbhi मनुज करे तू साधना, हनुमत देते ज्ञान। फिर भी मानव सो रहा, मोह की चादर तान।। रामदूत के ज्ञान को, रे मन! तू स्वीकार। राम नाम के जाप से, होगा भव से पार।। - सुनीता पाण्डेय 'सुरभि'