12:18 pm Wednesday , 12 August 2026
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उझानी में जाम से थमा शहर, पुलिस बनी मूकदर्शक: आधे घंटे तक रेंगता रहा ट्रैफिक।

उझानी-बदांयू 2 जुलाई।

बृहस्पतिवार दोपहर 1 बजे बादलों ने आसमान घेरा तो उझानी की सड़कें भी थम गईं। घंटाघर चौराहा जाम का एपिसेंटर बना। देखते ही देखते स्टेशन रोड, कछला रोड, बिल्सी रोड और बदायूं रोड तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आधे घंटे तक पूरा शहर जाम की गिरफ्त में कराहता रहा। ड्यूटी पर तैनात 6 पुलिसकर्मी तमाशबीन बने खड़े रहे।

आज दोपहर 1 बजे स्कूलों की छुट्टी के बाद बसों का काफिला घंटाघर चौराहे पर पहुंचा। उसी वक्त बारिश से बचने को ई-रिक्शा चालकों ने भी रफ्तार बढ़ा दी। बस, ई-रिक्शा, बाइक और कारें एक-दूसरे में उलझ गईं। चौराहा पूरी तरह पैक हो गया। जाम का असर शहर की हर सड़क पर दिखा।

मुख्य सड़कों पर फंसने के बाद लोगों ने गलियों का रुख किया। बाइक और ई-रिक्शा वाले तंग गलियों में घुस गए। नतीजा ये हुआ कि आधे घंटे के अंदर उझानी की हर गली-मोहल्ला भी जाम से हांफने लगा। एंबुलेंस तक फंसी रही।

हैरानी की बात ये कि घंटाघर चौराहे पर जाम न लगे, इसके लिए 6 पुलिसकर्मियों की स्थायी ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन बृहस्पतिवार को ये सिपाही भी लाचार नजर आए। भीषण जाम और चीख-पुकार के बीच सभी किनारे खड़े होकर तमाशा देखते रहे। यातायात पुलिस का भी कोई जवान नजर नहीं आया, जबकि नगर में यातायात प्रभारी मुरारी लाल राजपूत की तैनाती है। किसी ने भी वाहनों को व्यवस्थित कर जाम खुलवाने की जहमत नहीं उठाई।

इसी बीच तेज बारिश शुरू हो गई। जाम में फंसे स्कूली बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग आधे घंटे तक सड़क पर भीगते रहे। कोई शेड नहीं, कोई मदद नहीं। आखिरकार लोगों ने खुद ही मोर्चा संभाला। ई-रिक्शा और बसों को धक्का देकर, आड़े-तिरछे करके जैसे-तैसे रास्ता बनाया गया। करीब 1:30 बजे जाकर शहर की सांस लौटी।

स्थानीय दुकानदार रमेश अग्रवाल ने कहा, “हर दिन यही हाल होता है। पुलिस सिर्फ चालान काटने के लिए है क्या? 6 सिपाही खड़े थे, पर एक ने सीटी तक नहीं बजाई।” स्कूली बच्चों के अभिभावकों ने डीएम से शिकायत की तैयारी कर ली है।

बारिश से पहले ही उझानी का ट्रैफिक सिस्टम ध्वस्त हो गया। अगर पुलिस ऐसे ही मूकदर्शक बनी रही तो सावन माह में कांवड़ियों के चलने से हालात और बिगड़ सकते हैं।

राजेश वार्ष्णेय एमके

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