Priyanka
मंडप में बैठी थी तो किसी की बुआ,किसी की दीदी,किसी की मौसी, किसी की प्रेमिका और सबसे बढ़कर,पापा की छोटी सी बेटी थी
हँसी भी थी,शोर भी था,पर दिल कहीं चुप-चुप सा था
जब फेरे लेकर उठी,तो किसी की पत्नी,किसी की बहू,किसी की भाभी,चाची बन गई और उसी भीड़ मे खड़े-खड़े मैंने खुद को बदलते देखा
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