VeenaShri
कभी-कभी जाते हुए कदम थमना चाहते हैं…
जैसे कोई हमें पुकार कर रोक रहा हो।
सच तो ये है, रुकना हम भी चाहते हैं,
बस कह नहीं पाते।
लेकिन उसी पल वक़्त आकर हमारे बीच खड़ा हो जाता, और बिना आवाज़ के समझा देता है :
कुछ ठहराव सिर्फ़ ख़्वाहिश होते हैं, मुक़द्दर नहीं।
#अतरंगी_वीणा
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