Smart Naina
कंचन कामिनी सी काया से
यूं तुम सौंदर्य बरसाती सी चलती
पद्म की पंखुड़ी से होंठो में
दातों की दामिनी सी दमकती
गुलाब से गालों के संग जब मंदमन्द हँसती
अधर खोलो रस घोलो तुम
कुछ बोलो सुनने को है कोयल तरसती
स्याह बालों के बादल में जब तुम सिमटती
चंदन के वृक्ष से जैसे नागिनी लिपटती.
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