Piyano
वह हँसता है
मुझ पर
मैं हँसती हूँ
ख़ुद पर
और इस तरह
मैं बचा ले जाती हूँ उसे
दुनिया भर की हँसी से
मुझे हर उस बात पर
हँसी आती है
जिस पर क्रोधित हुआ जा सकता है
हताश और निराश भी
पर एक बेहतर ज़िंदगी के सापेक्ष
बस यही एक हँसी है
इसे मैं ख़ूब समझती हूँ
ऐसा अक्सर होता है कि
बहुत हँस चुकने के बाद
मैं एकदम से चुप हो जाती हूँ
गंभीर और शांत भी
मेरी चुप्पी पर एक साथ
कई सारे लोगों को
ख़ुश होते देखा मैंने
बेवजह हँसते हैं वे देर तक
समझदार लोग
बड़ी समझदारी से हँसते हैं
रखते हैं अपनी एक-एक
हँसी का हिसाब
इस मामले में मैं
बड़ी बेवक़ूफ़ ठहरी
फ़िज़ूलख़र्च कर दी
अपनी सारी हँसी
अब जो मिल जाए
मुट्ठी भर उदासी भी
तो उसे ही चूमती हूँ
और हँस पड़ती हूँ
वक़्त-बेवक़्त
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