2:21 pm Saturday , 15 August 2026
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हाथों की लकीरों से- neelam

neelam

हथेलियाँ खाली सी लगती हैं,
मानो एक तुम्हारे न होने से
कितना कुछ छूट गया हो
हाथों की लकीरों से।

हृदय के हर स्पंदन में
अब बस विरह धड़कता है
प्रेम ना स्वप्न की तरह ठहरता है
ना अश्रुओं के साथ बहता है
बस प्रतीक्षा बनकर
आँखों में ठिठक गया है।❣️❣️
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