सारिका सिंह (मनी ) न समझे हम गरूर ऐ इश्क उसका उसके इश्क मे क्या नहीं किया हमने...... उसके दर्द को अपने लिए माँगा रब से, अपनी तन्हाई मंजूर थी मगर उसके लिए महफ़िल मांगी हमने..... अब शिकवा भी नहीं शिकायत भी नहीं, किया था इश्क बस यही एक खता कर दी हमने... 🌹