बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
देश की आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं हम पर सच यह है कि हर तरफ विकास के दावों के बीच बदायूं वाले देश की राजधानी दिल्ली और प्रदेश की राजधानी लखनउ को जोडने वाली रेल सेवा पाने को आसूं बहा रहे हैं। पहले कांग्रेस ने विकास की रेल चलाई लेकिन बदायूं से दिल्ली और लखनउ को नहीं जोड पाई और पचास साल का समय उसके बाद बीत गया जिसमें कई सरकारें आई और चली गई और लम्बे समय के बाद कांग्रेसी सरकारों को रेल सेवा के मामले में बदायूं की उपेक्षा करने का आरोप लगाने वाली भाजपा की सरकार बडे जोर और शोर से चल रही है जिसे डबल इंजन की सरकार होने का दावा किया जा रहा है परंतु बदायूं को दिल्ली और लखनउ से जोडने वाली रेल सेवा मिलने का नम्बर नहीं आ रहा है। ऐसा नहीं कि बदायूं में विकास नहीं हो रहा और केंद्र सरकार के साथ प्रदेश सरकार का बदायूं पर कोई ध्यान नहीं है लेकिन रेल के मामले को लेकर भाजपा की डबल इंजन सरकार पर बदायूं की उपेक्षा करने का आरोप लगाने में आम आदमी कोई संकोंच नहीं कर रहा। पता नहीं बदायूं को दिल्ली और लखनउ तक पहुंचाने वाली रेल कब मिलेगी और इसका सेहरा किसके सिर बंधेगा।
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