बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
राजनीति कब कौन सी करवट लेगी इसका अंदाज बिहार के विधानसभा चुनाव में जगजाहिर कर दिया है। बिहार की जनता ने वोट की ताकत से जो करके दिखाया है उससे सबसे ज्यादा हतप्रभ वही लोग हैं जो आंकडों और इवीएम की तरफ देख रहे थे जबकि बिहार की जनता ने एक बार फिर वोट की ताकत को दिखा दिया। आम आदमी को तो बिहार की जीत वास्तव में वोट की जीत दिख रही है जबकि कोई इसे लोकतंत्र की जीत मान रहा है तो कुछ इसे आरोप की तराजू से तोलते नजर आ रहे हैं। इस चुनाव में सबसे खास बात यह रही जिसने अपनों को पहचान लिया उसके हिस्से में जीत आई जबकि अपनों को पहचानने में भूल करने वालों को सपनों की लालटेन को रोशनी नहीं मिल पाई। विश्व के सबसे बडे लोकतंात्रिक देश में जनता वोट की ताकत जानती है यह देख की जनता ने पूर्व के चुनावों में कई बार दिखाया है और इस चुनाव में भी वही नजर आया है जहां बडे बडे आंकलन सही स्थति तो क्या उसके आसपास तक नहीं दिखे। सबसे बडी बात यह रही कि जनता पूरी तरह खामोश नजर आई और उस खामोशी ने बडे – बडे जिलेदार और किलेदार धरासाई कर दिए।
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