सर्वार्थ सिद्धि योग में विजय मुहूर्त बना रहा है गुरु पूर्णिमा को विशेष आचार्य राजेश कुमार शर्मा
सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाये जाने का विधान है। इस तिथि को आषाढ़ पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। आईए जानते हैं आचार्य राजेश कुमार शर्मा से इसके महत्व के विषय में आचार्य के अनुसार इस दिन महान गुरु महर्षि वेदव्यास जिन्होंने ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और अट्ठारह पुराण जैसे अद्भुत साहित्यों की रचना की उनका जन्म हुआ था। इस दिन को वेद व्यास जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
गुरु पूर्णिमा, तिथि एवं शुभ मुहूर्त,
आचार्य शर्मा बताते हैं
ज्योतिष पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह की पूर्णिमा की शुरुआत 09 जुलाई को रात 1:39 मिनट पर होगी और अगले दिन यानी 10 जुलाई रात्रि 2:08 पर खत्म होगी। इस प्रकार से 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।
आचार्य शर्मा बताते हैं प्रातः काल से लेकर दिन में 3:56 तक संपूर्ण समय उत्तम है, आज सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है लेकिन उसमें विजय मुहूर्त का सर्वाधिक महत्व रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:51 से 12:46 तक है। विजय मुहूर्त में अपने गुरु एवं भगवान विष्णु के पूजन का सर्वाधिक महत्व बना रहेगा। विजय मुहूर्त भी दिन में 2:42 से 3:40 तक रहेगा।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
आचार्य राजेश कुमार शर्मा बताते हैं गुरु पूर्णिमा के दिन सभी गुरुओं का वंदन, नमन किया जाता है। गुरु पूर्णिमा के अगले दिन से सावन मास प्रारंभ हो जाता है, जिसका उत्तर भारत में बहुत महत्व है।
वहीं गुरु की हमारे जीवन में महत्व को समझाने के लिए गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा को गुरु-शिष्य परंपरा का उत्सव माना जाता है। इस दिन लोग अपने आध्यात्मिक, सामाजिक या शैक्षिक गुरु का सम्मान करते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं और उनके मार्गदर्शन के लिए कृतज्ञता प्रकट करते हैं। गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि उस ज्ञान की आराधना है जो जीवन के अंधकार को मिटाकर हमें सही राह दिखाता है।
आचार्य राजेश कुमार शर्मा
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