आंवला। आंवला में गुरुवार देर शाम तक सरगम रिसोर्ट में प्राइवेट डॉक्टर वेलफेयर एसोसिएशन की महापंचायत हुई। इसमें ग्रामीण और नगर क्षेत्र के प्राइवेट डॉक्टर शामिल हुए। डॉक्टरों ने कहा कि मरीजों का इलाज करने के बाद भी उन्हें ‘झोलाछाप’ कहकर अपमानित किया जाता है।
बैठक में महिला प्राइवेट डॉक्टरों ने भी अपनी बात रखी। डॉक्टरों ने सरकार से तीन या छह महीने की ट्रेनिंग देने, चिकित्सा के नियम सिखाने और प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वे ट्रेनिंग लेने के लिए तैयार हैं।
डॉक्टरों ने मांग की कि उन्हें ‘झोलाछाप’ कहने के बजाय ‘जीवन रक्षक’ या ‘जीवन रक्षक मित्र’ कहा जाए।
डॉ. रेहान खान ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में वे 30 रुपये की पुड़िया देकर मरीजों का बुखार उतारते हैं और सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों की मदद करते हैं। उन्होंने सवाल किया कि बड़े अस्पतालों में मरीज की मौत होने पर अधिकारियों की ओर से सवाल क्यों नहीं किए जाते, जबकि छोटे डॉक्टरों पर कार्रवाई होती है।
महापंचायत में मुख्य अतिथि के तौर पर मझगवां ब्लॉक प्रमुख यशवंत सिंह और रामनगर ब्लॉक प्रमुख पति मित्रपाल सिंह पहुंचे। दोनों ने डॉक्टरों की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बड़े अस्पतालों ने अपने दरवाजे बंद कर लिए थे।
तब इन डॉक्टरों ने एक सैनिक की तरह अपनी जान की परवाह किए बिना गांव-गांव में लोगों की जान बचाई थी। उन्होंने डॉक्टरों को ‘स्वास्थ्य मित्र’ का नाम दिए जाने की वकालत की और भरोसा दिलाया कि वे इस मांग और प्रस्ताव को प्रदेश सरकार तक पहुंचाएंगे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी डॉक्टरों ने हाथ उठाकर एकजुटता की कसम खाई।
इस महाबैठक का कुशल संचालन महासचिव डॉ. नवीजान सैनी के हाथों में रहा। मंच पर संगठन की ओर से संरक्षक डॉ. अजय राज शर्मा, डॉ. बच्चन सिंह, डॉ. आर.ए. सैनी, डॉ. जितेन्द्र सिंह, डॉ. मनोहर लाल मौर्य, डॉ. महिपाल सिंह, डॉ. टी.आर. गोले और ओबीसी मोर्चा के जिला अध्यक्ष डॉ. अमर सिंह मौजूद रहे। वहीं सत्ता पक्ष से मुख्य अतिथि के तौर पर भाजपा के आंवला जिला अध्यक्ष आदेश प्रताप सिंह ने भी कार्यक्रम में शिरकत की।


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