

बिसौली। आदर्श रामलीला कमेटी दिसौली गंज के रंगमंच पर भव्य रामलीला मंचन ने भक्तिभाव से ओतप्रोत वातावरण निर्मित कर दिया।बिसौली। आदर्श रामलीला कमेटी दिसौली गंज के रंगमंच पर भव्य रामलीला मंचन ने भक्तिभाव से ओतप्रोत वातावरण निर्मित कर दिया। बिसौली। आदर्श रामलीला कमेटी दिसौली गंज के रंगमंच पर भव्य रामलीला मंचन ने भक्तिभाव से ओतप्रोत वातावरण निर्मित कर दिया। मंच पर राम (अरविंद तिवारी)–केवट (रामानन्द तिवारी) संवाद तथा भरत (ब्रजेश शाक्य)–शत्रुघ्न (कृष्णा ठाकुर) मिलाप का अत्यंत भावनात्मक और जीवंत मंचन किया गया।
कलाकारों ने राधेश्याम रामायण की मधुर चौपाइयों प्रभु चरन पखारत केवट प्यारा, हरषि हरषि पुलकाय सारा। के माध्यम से वह अद्भुत क्षण साकार कर दिया जब केवट प्रभु श्रीराम के चरण पखारने का सौभाग्य प्राप्त करता है। इस दृश्य ने दर्शकों के नेत्रों को नम कर दिया। भरत मिलाप प्रसंग में जब भरत और श्रीराम का स्नेहिल मिलन हुआ, तो पूरा मैदान जय श्रीराम और जय भरत जी की के जयघोषों से गूंज उठा। भावनाओं से भरे इस दृश्य ने दर्शकों के हृदय में भ्रातृप्रेम और त्याग की गाथा को सजीव कर दिया। राम की भूमिका निभा रहे अरविंद तिवारी ने कहा केवट संवाद हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में कोई भेदभाव नहीं होता, भगवान हर भक्त के हृदय में निवास करते हैं। केवट की भूमिका निभाने वाले रामानंद तिवारी ने कहा भगवान राम का चरण पखारने का सौभाग्य केवल प्रेम और समर्पण से ही मिलता है, किसी पद या जाति से नहीं। भरत की भूमिका निभाने वाले ब्रजेश शाक्य ने कहा भरत मिलाप त्याग, मर्यादा और भ्रातृप्रेम का अनुपम उदाहरण है। शत्रुघ्न के रूप में कृष्णा ठाकुर ने कहा कि राम कथा का हर प्रसंग जीवन को धर्म, नीति और कर्तव्य का सन्देश देता है। पूरे मंचन के दौरान कलाकारों के संवाद, संगीत और प्रकाश सज्जा ने दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति करा दी। गया।
कलाकारों ने राधेश्याम रामायण की मधुर चौपाइयों प्रभु चरन पखारत केवट प्यारा, हरषि हरषि पुलकाय सारा। के माध्यम से वह अद्भुत क्षण साकार कर दिया जब केवट प्रभु श्रीराम के चरण पखारने का सौभाग्य प्राप्त करता है। इस दृश्य ने दर्शकों के नेत्रों को नम कर दिया। भरत मिलाप प्रसंग में जब भरत और श्रीराम का स्नेहिल मिलन हुआ, तो पूरा मैदान जय श्रीराम और जय भरत जी की के जयघोषों से गूंज उठा। भावनाओं से भरे इस दृश्य ने दर्शकों के हृदय में भ्रातृप्रेम और त्याग की गाथा को सजीव कर दिया। राम की भूमिका निभा रहे अरविंद तिवारी ने कहा केवट संवाद हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में कोई भेदभाव नहीं होता, भगवान हर भक्त के हृदय में निवास करते हैं। केवट की भूमिका निभाने वाले रामानंद तिवारी ने कहा भगवान राम का चरण पखारने का सौभाग्य केवल प्रेम और समर्पण से ही मिलता है, किसी पद या जाति से नहीं। भरत की भूमिका निभाने वाले ब्रजेश शाक्य ने कहा भरत मिलाप त्याग, मर्यादा और भ्रातृप्रेम का अनुपम उदाहरण है। शत्रुघ्न के रूप में कृष्णा ठाकुर ने कहा कि राम कथा का हर प्रसंग जीवन को धर्म, नीति और कर्तव्य का सन्देश देता है। पूरे मंचन के दौरान कलाकारों के संवाद, संगीत और प्रकाश सज्जा ने दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति करा दी। किया गया।
कलाकारों ने राधेश्याम रामायण की मधुर चौपाइयों प्रभु चरन पखारत केवट प्यारा, हरषि हरषि पुलकाय सारा। के माध्यम से वह अद्भुत क्षण साकार कर दिया जब केवट प्रभु श्रीराम के चरण पखारने का सौभाग्य प्राप्त करता है। इस दृश्य ने दर्शकों के नेत्रों को नम कर दिया। भरत मिलाप प्रसंग में जब भरत और श्रीराम का स्नेहिल मिलन हुआ, तो पूरा मैदान जय श्रीराम और जय भरत जी की के जयघोषों से गूंज उठा। भावनाओं से भरे इस दृश्य ने दर्शकों के हृदय में भ्रातृप्रेम और त्याग की गाथा को सजीव कर दिया। राम की भूमिका निभा रहे अरविंद तिवारी ने कहा केवट संवाद हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में कोई भेदभाव नहीं होता, भगवान हर भक्त के हृदय में निवास करते हैं। केवट की भूमिका निभाने वाले रामानंद तिवारी ने कहा भगवान राम का चरण पखारने का सौभाग्य केवल प्रेम और समर्पण से ही मिलता है, किसी पद या जाति से नहीं। भरत की भूमिका निभाने वाले ब्रजेश शाक्य ने कहा भरत मिलाप त्याग, मर्यादा और भ्रातृप्रेम का अनुपम उदाहरण है। शत्रुघ्न के रूप में कृष्णा ठाकुर ने कहा कि राम कथा का हर प्रसंग जीवन को धर्म, नीति और कर्तव्य का सन्देश देता है। पूरे मंचन के दौरान कलाकारों के संवाद, संगीत और प्रकाश सज्जा ने दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति करा दी।
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