Sugandha Sharma वहाँ प्रेम धीरे-धीरे मोह से निकलकर आध्यात्म बन जाता है। क्योंकि सच्चा प्रेम किसी को बाँधता नहीं, बस उसकी मौजूदगी में मन को थोड़ा और शांत कर देता है।