Pushpa जरुरत के मुताबिक जिंदगी जियो ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं ,क्योंकि जरुरत तो फकीरों की भी पूरी हो जाती है, और ख्वाहिशें बादशाहों की भी अधूरी रह जाती है।