“पानी बचाओ” का नारा उझानी में नाली-नाली बहा, पालिका बनी अंजान!
उझानी बदांयू 29 मई।
“पानी बचाकर चलो” का सरकारी नारा उझानी में मजाक बन गया है। नगर पालिका ने तो इस नारे के मायने ही बदल डाले। यहाँ पानी बचता नहीं, बहाया जाता है।
पंजाबी कॉलोनी के बारात घर के पास पीने के पानी की पाइप लाइन पिछले कई दिनों से फूट-फूट कर रो रही है। नतीजा? हजारों लीटर साफ-स्वच्छ पानी सीधे नाली में समा रहा है। एक तरफ सरकार पानी की एक-एक बूंद बचाने की अपील कर रही है, दूसरी तरफ उझानी नगर पालिका की लापरवाही से गंगा बह रही है, वो भी नाली में।
राहगीर हुए पानी-पानी, कपड़े हुए कीचड़-कीचड़
लीकेज से सड़क तालाब बन गई है। कॉलोनीवासियों का निकलना मुहाल है। रही-सही कसर तेज रफ्तार बाइक वाले पूरी कर देते हैं। पानी से गुजरते ही बाइक के टायर राहगीरों पर कीचड़ की बौछार कर देते हैं। ऑफिस जाने वाले हों या स्कूल जाने वाले,सबके कपड़े खराब।
शिकायतें गईं कूड़ेदान में
स्थानीय लोगों ने कई बार नगर पालिका में गुहार लगाई, पर साहब ने उधर मुड़कर तक नहीं देखा। लगता है पालिका के कान में तेल और आँखों पर पट्टी बंधी है।
जब “जल है तो कल है” का पाठ पढ़ाया जा रहा है, तब उझानी में “जल है तो नाली है” का नया फॉर्मूला चल रहा है। अब देखना ये है कि पालिका की नींद कब टूटती है, या पानी यूं ही बहता रहेगा।
राजेश वार्ष्णेय एमके।


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