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उझानी स्टेशन पर ‘मौत की सुरंग’ बनी मालगाड़ी, फुट ओवरब्रिज न होने से डिब्बों के नीचे से निकली जिंदगियां।

उझानी स्टेशन पर ‘मौत की सुरंग’ बनी मालगाड़ी, फुट ओवरब्रिज न होने से डिब्बों के नीचे से निकली जिंदगियां।

उझानी में रेलवे का ‘अंधा कानून’, खड़ी मालगाड़ी के नीचे से रेंगने को मजबूर यात्री, कंट्रोलर ने झोंकी दो ट्रेनें।

उझानी, बदायूं 4 मई 2026।

साहब, उझानी स्टेशन पर यात्री टिकट खरीदकर मौत खरीद रहे हैं। मंगलवार दोपहर 12 बजे के आस-पास रेलवे के कारनामे ने सबके होश उड़ा दिए। बीच की दो नंबर लाइन पर मालगाड़ी सांप बनकर बैठी थी, ऊपर से कंट्रोलर ने दो ट्रेनें एक साथ भिड़ा दीं। नतीजा? प्लेटफॉर्म 3 पर जाना था तो मालगाड़ी के डिब्बों के नीचे से रेंगो।

आज दोपहर 12 बजे का नजारा रोंगटे खड़े कर दे। बच्चे, बूढ़े, महिलाएं — सब मालगाड़ी के पहियों के बीच से सिर झुकाकर निकल रहे थे। एक तरफ इंजन की गर्मी, दूसरी तरफ हादसे का खौफ। ऊपर से फुट ओवरब्रिज का नामोनिशान नहीं। यात्री बोले, “रेलवे ने तो हमें कीड़े-मकोड़े समझ लिया।”

सवाल ये है कि जब बीच में मालगाड़ी खड़ी थी तो कंट्रोलर ने दो ट्रेनें क्यों क्रॉस कराईं? क्या उसे यात्रियों की जान की कीमत मालूम नहीं? प्लेटफॉर्म ब्लॉक हुआ तो यात्री पटरियों पर कूदे। हादसा होता तो जिम्मेदार कौन?

4000 यात्री रोज गुजरते हैं यहां से, पर FOB फाइलों में अटका है। स्टेशन मास्टर से पूछो तो ‘ऊपर से ऑर्डर नहीं’। मंडल अधिकारी जांच का झुनझुना पकड़ा देते हैं। कब तक? जब तक कोई कट न जाए?

“बेटे को गोद में लेकर डिब्बे के नीचे से निकली हूं। भगवान न करे ब्रेक खुल जाए तो?” — सुमन देवी, यात्री।

बोले गुस्साए युवा-“MP-MLA वोट लेने आते हैं, FOB बनवाने नहीं”।

उझानी स्टेशन आज ‘लापरवाही का अड्डा’ बन चुका है। रेलवे जागे, वरना अगली हेडिंग किसी हादसे की होगी- नरेन्द्र कुमार यात्री।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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