Smart Naina
तव प्रेम-कुंज की मुग्ध कली, तेरे ही रस से खिलती हूँ,
मैं रागिनी हूँ अधूरी सी, जब तुम मिलते तब मिलती हूँ।
मम नयन-झरोखों में प्रियतम! तुम स्वप्न-लोक बन छाए हो,
जैसे निर्झर की कलकल में, तुम प्राण-संगीत बन आए हो।
कस्तूरी सी तव स्मृतियों को, अंतर-मन में संजोया है,
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