सुनीता पाण्डेय ‘सुरभि’🪈🦚🪷🪄🕉️
महिला दिवस के उपलक्ष में नारियों का प्रतिनिधित्व करता मेरा एक गीत-
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नारी ने कब माँगा वैभव,
कब माँगे अधिकार।
मिला न,फिर भी उसको प्यार।
सीता बनकर वन-वन भटकी,
अवधपुरी की रानी।
डिगा न पाई कंचन नगरी,
हार गया अभिमानी।
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