9:07 am Saturday , 15 August 2026
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कब देखेगें अपना आंगन, छलनी से ज्यादा है छाजन ?

बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
बदायूं को लेकर एक बात तो कही जा सकती है कि सडकों की बदहाली किसी से छिपी है, जिला मुख्यालय से लेकर तमाम तहसील, ब्लाक तो क्या गावों की पगडंडी तक कोई जगह हो कहीं पर सडक मुश्किल से दिखेगी, सडक में गडडे नहीं हर जगह गडडों में सडक ढूंढने को टीन का चश्मा लगाना एक मजबूरी सी नजर आ रही है। पता नहीं हमारे पालनहारों के पास जब शीतल प्याउ लगाने को पैसा है, यात्री स्टेंड लगवाने को पैसा है, जेसीबी औा वाहन खरीदने को भी पैसा है तो सडकों की बदहाली दूर कराने को पैसा क्यों नहीं है, आत आदमी को तो लगता है कि काम वह हो रहे हैं जिनमें कमीशन से तिजोरी भर जाती हो और सडकों के निर्माण की टेंडर प्रक्रिया आनलाइन होने के बाद कमीशन मिलने का रास्ता छोटा हो जाने के कारण पालनहार इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं लेकिन बदायूं में रोडवेज की बदहाली किसी से छिपी नहीं ह ैजहां परिसर में तालाव, और रोडवेज की इमारत पुरातन पहचान बनकर खंडहर सी खडी है उसको देखने की फुरसत कब मिलेगी।

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